आप लोगो को ब्रह्मा जी तो याद ही होंगे जो आदमी बनाते है |
एक बार की बात है, ब्रह्मा जी को अपने साले की शादी मैं जाना था अब आदमी बनाने का महतवपूर्ण काम छोड़ कर जाये तो कैसे | पर जाना भी तो जरुरी था तो भाई वही पर काम करने वाले एक साथी सहयोगी को अपनी कुर्सी पर बिठा कर कुछ काम वाम समझा कर चल दिए ३ दिन की छुट्टी पर |
जिस आदमी को काम पर लगाया था वो था काम का भूका उसने देखा की एक कमरे मैं आदमी बनाने के पार्ट्स पड़े थे बस उनको जोड़ना बाकि था जिसे आदमी बन जाता होगा. और जो कामगार इन पार्ट्स को जोड़ने का काम करते थे वो एक कमरे मैं बैठ कर तीन पत्ती खेल रहे थे उस आदमी ने पुछा की तुम लोगो को कुछ काम नहीं है क्या जो पत्ते खेल रहे हो तो उनमे से एक बोला की भाई साहब आर्डर नहीं आया है आप आर्डर निकल दो तो हम लोगो के पास काम ही काम है फ़िलहाल आदमी बनाने का कोई आर्डर नहीं निकला हुआ है साहब इसलिए हम लोग कुछ नहीं कर रहे है | अब तो उन भाई साहब को मानो मजा आ गया उन्होंने झटपट आर्डर निकाल दिया नए आदमी बनाने का |
बस फिर क्या था ३ दिनों मैं बहुत से आदमनी तयार हो गए | जब भ्रम जी शादी से वापस लोटे तो देखा की पार्ट्स वाले रूम मैं पार्ट्स लग्बह्ग ख़तम हो गए थे उन्होंने उस आदमी से पुछा की ये आप ने क्या किया बिना आर्डर के ही आदमी बनवा दिए चलो कोई बात नहीं पर क्या आपने ये रूम खोला | उस आदमी ने कहा की नहीं मैंने तो सिर्फ पार्ट्स वाला रूम ही खोला था जो आदमी बनाने के लिए जरुरी था इस रूम में क्या है | तो ब्रह्मा जी ने कहा की इस रूम में आदमी का दिमाग रखा हुआ है वो भी इन पार्ट्स के | अब अगर औडिट हो गई तो मैं क्या जवाब दूंगा ऑडिटर को अब ऐसा करो की जल्दी से ये सरे दिमाग बचे हुए पार्ट्स के साथ फिट कर दो जिसमे जितने आ जाये बस इनको ख़तम करना है और हा ये काम जल्दी हो जाये उतना ही अच्छा है | अब क्या था जो बाकि पार्ट्स बचे थे उनमे उन सारे दिमागों को भर दिया गया और काम ख़तम कर दिया गया
मित्रो ब्रह्मा जी की उन ३ दिनों की छुट्टी और उस भले मानस की काम की इच्छा को हम आज तक भुगत रहे है |
कैसे जिन लोगो मैं दिमाग डाला ही नहीं गया था वो हे आप और हम |
और जिन लीगों मैं दिमाग जरोरत से जयादा ड़ाल दिया था वो हे जो हमको चला रहे है वो हमको बिना बात ही लूट रहे है पैसा बना रहे है और न जाने क्या क्या कर रहे है |
वो लोग इतने insecure है की बस पैसा बन ले जो भी हो जायाडा से जयादा अपने कब्जे मैं के ले पता नहीं कल क्या होगा |
या फिर वो हम सब को वो बनाना चाह रहे है जो हम आज़ादी से पहले थे मेरा मतलब समझ रहे है न आप |
इन एक्स्ट्रा ordinary लोगो ने इतना अच्छा जाल बुना है की आप और हम इसको जानते हुए भी कुछ नहीं कर सकते क्यू की कुछ किया तो हमारी नौकरी चली जाएगी या हमको क्या करना है जब लोगो को ही कोई परवाह नहीं है तो और न जाने क्या क्या बहाने बना लेते है अपने आप को समझा लेने के |
आज चीनी बहुत महंगी हो गई है की आम आदमी उसको खरीद नहीं सकता या यु कहे की उस कीमत पर नहीं मिल रही जिस दाम पर आम आदमी को मिलनी चाहिये | ४८ रुपये किलो चाहिये तो जितने किलो चाहिये उतनी मिल जायगी पर २४ रुपये किलो नहीं मिल सकती क्यू की उससे एक्स्ट्रा ordinary लोगो को प्रोफिट नहीं होगा इसलिए ये चीनी उनके गोदामों से बहार नहीं आ सकती क्यू की वो सड़ सकती है, ख़राब हो सकती है लेकिन कम कीमत पर लोगो को नहीं मिल सकती |
ब्रह्मा जी आप ने एक गलती कर दी और उसकी सजा हम लोगो को यानि सारी दुनिया को हमेसा भुगतनी पड़ेगी |
मेरे प्यारे देश के बिना दिमाग के लोगो अपने दिल से काम लो और इन एक्स्ट्रा ordinary लोगो को सबक सिखा कर अपना और अपने बच्चो का future बचा लो जागो और इनको भारत के संविधान की वो पंक्तिया याद दिला दो जिनको ये लोग सिर्फ अपने लिए ही सार्थक कर रहे है |
"हम भारत के लोग भारत को ....."
मैं उस पवित्र ग्रन्थ की आड़ ले कर कुछ नहीं कहना चाहता ये उसका अपमान होगा जिससे उन लोगो को कोई फर्क नहीं पड़ता क्यू की .....
आप सभी को धन्यवाद.
Saturday, January 23, 2010
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