Saturday, November 14, 2009

अपनी तो कट गई अब अपनी सोचो भाई

चाय की थडी पर दूस्तो का हुजूम लगा हुआ था | चाय की चुस्कियों के साथ लम्बी लम्बी दींगो का सिलसिला भी चल रहा था |
यार polictics  ने  इस देश का बनता dhaar कर दिया है सब के सब बेईमान है | कोई देश के बारे मैं नहीं सोचता सब साले अपनी jabe  भरने मैं लगे हुए है इस देश का कुछ नहीं हो सकता ये देश तो गर्त मैं जा रहा है | सब लोगो के यही विचार थे एक बही साहब बिलकुल chup चाप बैठे थे चाय पि रहे थे पर उनलोगों की बातो को सुन जरूर रहे थे
बाते आगे बड़ी ---- उस नेता ने ये घोटाला कर दिया उस अफसर ने ये कर दिया , वहा  ऐसा हो रह है , ख़राब गेहू बट रहा है, ऐसा वैसा आदि आदि ,
सब कुछ न कुछ बूल रहे थे पर उन बही साहब को बुलता नहीं देख कर एक ने उनसे पुछा क्यू  भाई साहब आप अपने देश के हालात के बारे मैं कुछ नहीं कहंगे | आप को नहीं लगता ये सब गलत हो रह है |
अब भाई साहब थोडा मुस्कुराये और बोले सुनो भांडू गलाटी हो रहा है तो भी और सही हो रहा है तो भी आप के बोलने से और मेरे सुनने से क्या होगा | आप बोलो और मैं सुन ले तो उससे उन लोगो को क्या फरक पड़ेगा जो इन सब मैं भागीदार है वो तो अपना काम कर रहाइ है और आगे भी करते रहंगे आप सिर्फ बोलते रह जाओगे और वो अपना काम करते रहंगे |
अब आप बताओ की आप और  हम तो फालतू मैं ही उनलोगों की ताकत bada रहे  है |
जितना आप जानते है उतना मैं भी जनता हु और आप मुझसे ज्यादा जानते है|
नेता हो या व्यापारी, अफसर हो या आम आदमी मेरे दोस्त को भी लालच से नहीं बच पा रहा है इसलिए ये सब हो रहा है |



अगर लोगो को सुधारना है तो सिकायत बंद करो और apne andar से लालच को बहार निकलकर उसको हमेसा के लिए ख़तम कर दो फिर न आप किसी की सिकायत करोगे और न ही कोई आप को सिकायाटी का मोका देगा |

ज्यादा का क्या करोगे भाई जो आप के लिए जरोरी है उसी को काम मैं लो और बाकि दुसरो के लिए छुडी दो आप भी shuki हो जाओगे और आप को फालतू के सभी jhanjhoto से मुक्ति भी मिल जायगी फिर जो भी करो गे उसके piche लालच नहीं होगा तो उसके प्रति pane की नहीं बाटने की भावना अपने आप ही बन जायगी |

आप की बातो का और साड़ी दुनिया को सीखी करने का यही तरीका है बही सब तो बिज़नस है और बिज़नस मैं तो एक को फायदा और दुसरे को नुक्सान होता ही है न और बिज़नस देने का नाम तो है नहीं अब आप को क्या करना है  अपनी सोचो भाई

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