चाय की थडी पर दूस्तो का हुजूम लगा हुआ था | चाय की चुस्कियों के साथ लम्बी लम्बी दींगो का सिलसिला भी चल रहा था |
यार polictics ने इस देश का बनता dhaar कर दिया है सब के सब बेईमान है | कोई देश के बारे मैं नहीं सोचता सब साले अपनी jabe भरने मैं लगे हुए है इस देश का कुछ नहीं हो सकता ये देश तो गर्त मैं जा रहा है | सब लोगो के यही विचार थे एक बही साहब बिलकुल chup चाप बैठे थे चाय पि रहे थे पर उनलोगों की बातो को सुन जरूर रहे थे
बाते आगे बड़ी ---- उस नेता ने ये घोटाला कर दिया उस अफसर ने ये कर दिया , वहा ऐसा हो रह है , ख़राब गेहू बट रहा है, ऐसा वैसा आदि आदि ,
सब कुछ न कुछ बूल रहे थे पर उन बही साहब को बुलता नहीं देख कर एक ने उनसे पुछा क्यू भाई साहब आप अपने देश के हालात के बारे मैं कुछ नहीं कहंगे | आप को नहीं लगता ये सब गलत हो रह है |
अब भाई साहब थोडा मुस्कुराये और बोले सुनो भांडू गलाटी हो रहा है तो भी और सही हो रहा है तो भी आप के बोलने से और मेरे सुनने से क्या होगा | आप बोलो और मैं सुन ले तो उससे उन लोगो को क्या फरक पड़ेगा जो इन सब मैं भागीदार है वो तो अपना काम कर रहाइ है और आगे भी करते रहंगे आप सिर्फ बोलते रह जाओगे और वो अपना काम करते रहंगे |
अब आप बताओ की आप और हम तो फालतू मैं ही उनलोगों की ताकत bada रहे है |
जितना आप जानते है उतना मैं भी जनता हु और आप मुझसे ज्यादा जानते है|
नेता हो या व्यापारी, अफसर हो या आम आदमी मेरे दोस्त को भी लालच से नहीं बच पा रहा है इसलिए ये सब हो रहा है |
अगर लोगो को सुधारना है तो सिकायत बंद करो और apne andar से लालच को बहार निकलकर उसको हमेसा के लिए ख़तम कर दो फिर न आप किसी की सिकायत करोगे और न ही कोई आप को सिकायाटी का मोका देगा |
ज्यादा का क्या करोगे भाई जो आप के लिए जरोरी है उसी को काम मैं लो और बाकि दुसरो के लिए छुडी दो आप भी shuki हो जाओगे और आप को फालतू के सभी jhanjhoto से मुक्ति भी मिल जायगी फिर जो भी करो गे उसके piche लालच नहीं होगा तो उसके प्रति pane की नहीं बाटने की भावना अपने आप ही बन जायगी |
आप की बातो का और साड़ी दुनिया को सीखी करने का यही तरीका है बही सब तो बिज़नस है और बिज़नस मैं तो एक को फायदा और दुसरे को नुक्सान होता ही है न और बिज़नस देने का नाम तो है नहीं अब आप को क्या करना है अपनी सोचो भाई
Saturday, November 14, 2009
Monday, November 9, 2009
दाल रोटी कैसे खाए प्रभु के गुण कैसे गाये
दाल रोटी कैसे खाए प्रभु के गुण कैसे गाये
दाल १०० रुपये किलो ! अब क्या खाए
मित्रो आप जो भी हो दाल खा सकते है ? शायद हां और शायद नहीं खैर आप दाल खाए या नहीं इससे कोई फरक नहीं पड़ता दाल तो दाल है ! अच्छा गरीब लोग क्या खा रहे है | आप को कोई मतलब नहीं हा हो भी कैसे | कोई आप के लिए गोली खाए या गोला आप को क्या मतलब है | आखिर आप उसके लिए उनको पे करते है और ये उनका काम है | और जो घूस खा रहे है उनसे भी आप को क्या मतलब है वो जो कर रहे है उससे आप को क्या फरक पड़ने वाला है |
चलो जो भी है आप क्या खा रहे हो गम , दुःख, संतोष , इत्यादि इत्यादि |
और नेताओ और बड़े सेठो या लालाओ के कुत्ते क्या खा रहे है , १२० रुपये किलो का dog फ़ूड जो सबसे सस्ता है |
अच्छा गरीबो को रहने के लिए प्लाट या मकान मिल रहे है या नहीं या फिर गरीब लोग अपने मिले हुए जमीनों और ,मकानों को उचे दामो पर सेठो और लालाओ को बीच रहे है ताकि उनकी जरोरते पूरी हो सके | रोटी कपडे की मकान और जमीन तो मिले पर भी उन्होंने उसे तो बीच दिए. खैर चो जी हमको इन सब से क्या मतलब है हमारा और सभी का काम तो चल रहा है न|
जिन्दी चार दिन की है फिर क्यू किसी से दुश्मनी मोल ले |
अच्छा भाई आज इनता ही मूड है बाकि बाद मैं
दाल १०० रुपये किलो ! अब क्या खाए
मित्रो आप जो भी हो दाल खा सकते है ? शायद हां और शायद नहीं खैर आप दाल खाए या नहीं इससे कोई फरक नहीं पड़ता दाल तो दाल है ! अच्छा गरीब लोग क्या खा रहे है | आप को कोई मतलब नहीं हा हो भी कैसे | कोई आप के लिए गोली खाए या गोला आप को क्या मतलब है | आखिर आप उसके लिए उनको पे करते है और ये उनका काम है | और जो घूस खा रहे है उनसे भी आप को क्या मतलब है वो जो कर रहे है उससे आप को क्या फरक पड़ने वाला है |
चलो जो भी है आप क्या खा रहे हो गम , दुःख, संतोष , इत्यादि इत्यादि |
और नेताओ और बड़े सेठो या लालाओ के कुत्ते क्या खा रहे है , १२० रुपये किलो का dog फ़ूड जो सबसे सस्ता है |
अच्छा गरीबो को रहने के लिए प्लाट या मकान मिल रहे है या नहीं या फिर गरीब लोग अपने मिले हुए जमीनों और ,मकानों को उचे दामो पर सेठो और लालाओ को बीच रहे है ताकि उनकी जरोरते पूरी हो सके | रोटी कपडे की मकान और जमीन तो मिले पर भी उन्होंने उसे तो बीच दिए. खैर चो जी हमको इन सब से क्या मतलब है हमारा और सभी का काम तो चल रहा है न|
जिन्दी चार दिन की है फिर क्यू किसी से दुश्मनी मोल ले |
अच्छा भाई आज इनता ही मूड है बाकि बाद मैं
Thursday, September 17, 2009
अपने को क्या मतलब है
एक भाई साहब नई मोटर साइकिल ले कर जा रहे थे पीछे की सीट पर एक मित्र भी बैठा था, सड़क पर बहुँत गड्ढे थे तो भाई साहब बोले यार ये नेता लोग जनता का सारा पैसा खा रहे है, थोड़ा पैसा इन सडको पर भी खर्च कर दे तो, गाडिया ठीक रहेगी और एक्सीडेंट भी कम हो जायंगे, तो मित्र बोला यार तेरे सोचने से क्या होगा तू तो बस जिस काम के लिए जा रहे है उसके बारे मैं सोच, तो भाई साहब ने कहा की हा यार पता नही आज भी नेताजी मिलेगे या नही उनको खुश कर दे तो टेंडर हमे मिल सकता है अब टेंडर रेट भी बहुत कम कर दिया है और सभी नेता और अफसरो की भी जेबे गरम कर दी है, अब सड़क के लिए मटेरिअल सप्लाई में घटिया माल ही देना पड़ेगा और फिर सडके तो ऐसे ही बनेगी, अब छोड़ो यार हमको इससे क्या मतलब है अपने बाप क्या क्या जाता है जब नेता और ऑफिसर ही देश के बारे मैं नही सोचते तो हम क्यू सोचे, हमारा ठेका सड़क बनाने का देश बनने का थोड़े ही है, सड़क अच्छी हो या घटिया अपने बाप का क्या जाता है हम तो बिज़नस मैंन है हमको इन सब चीजो से क्या मतलब है|
Wednesday, September 16, 2009
30% is greater then 70%
Oh, what a silly argument. But it Indian perspective t is true. How ? Lets take a look
There are around 30% politician among Indian (approx)
Around 30 to 40% people have all the facilities to live smoothly.
There are 30 to 40% people own the total share of available in India in spite of Indian government.
30% of land part is green but not proper as per the requirement of fresh air. which is to be 65 to 70%.
We import around 60 to 70% of some dependable things but not able to export more than 10%.
70% of government schemes are known by 30 of Indian as they are able to reach out to them and not known by approx 70% Indian.
We have around 30% government machinery who serves Indian...? (Really)
We have 30 to 40 percent schools in villages with less then 2 to 4 teachers.
Now a days around 30% of government work is done by tenders or on contract base.
we have only 20 to 30% fully prepared rods in village where 40 to 70 percent lives there.
well it is along list to be continued...
There are around 30% politician among Indian (approx)
Around 30 to 40% people have all the facilities to live smoothly.
There are 30 to 40% people own the total share of available in India in spite of Indian government.
30% of land part is green but not proper as per the requirement of fresh air. which is to be 65 to 70%.
We import around 60 to 70% of some dependable things but not able to export more than 10%.
70% of government schemes are known by 30 of Indian as they are able to reach out to them and not known by approx 70% Indian.
We have around 30% government machinery who serves Indian...? (Really)
We have 30 to 40 percent schools in villages with less then 2 to 4 teachers.
Now a days around 30% of government work is done by tenders or on contract base.
we have only 20 to 30% fully prepared rods in village where 40 to 70 percent lives there.
well it is along list to be continued...
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