Monday, October 18, 2010

अत्यंत दुःख के साथ सूचित किया जाता है की हमारी फेसबुक बंद हो गई है | अब हमारी सारी फसल सड़ जायगी| हम बोहत दुखी है

Sunday, August 15, 2010

बढती आर्थिक असमानता समाज के लिए घातक












viuh vkfFkZd dwVuhfr;ksa ds }kjk ,d ns’k ds }kjk nwljs ns’k dk ‘kks”k.k ls iwathoknh lkezkT;okn dks c
   blh izdkj ,d ns’k esa ukxfjdksa ds chp vkfFkZd vlekurk Hkh c< jgk gSA tgka ,d vkSj vjcifr;ksa dh la[;k c< jgh gSa ogh ns’k esa vkRegR;k djus okys fdlkuksa dh Hkh la[;k c< jgh gSA ,d rjQ vukt leqnzks esa Qsadk tk jgk gS ogha nwljh  vkSj ,d vjc vkcknh Hkw[ksa lksus dks etcwj gSA ,d thfor O;fDr dh dher yxHkx 5&10 izfr’kr izfro”kZ c< jgh gS tcfd e`r lEifRr dh dher 25&100 izfr’kr izfro”kZ c< tkrh gS ;gha iwathokn dk nq”ifj.kke gSA nqfu;k esa vehj vkSj vehj gksrs tk jgs gS vkSj xjhc le; ds vuqlkj iSlk u dek ikus ]u cpk ikus vkSj u c< xbZ fd vke vkneh dks jksVh diMk vkSj edku tSlh ewyHkwr lqfo/kk,sa Hkh lLrs esa ulhc ugha gks ik jgh gSA lkjh dh lkjh dqN yksxksa ds ikl dsfUnzr gks xbZ gSA vesfjdk bl iwWthokan dk ToyUr mnkgj.k gS ftlds ifj.kke vc n`f”Vxr gksus yxs gS vkSj ogka Hkh eagxkbZ vkSj Hkw[kejh dk lkezkT; QSy x;k gS vkSj ;gh fLFkfr vc Hkkjr dh gksus okyh gSA tks O;fDr lekt dk ftruk vf/kd ‘kks”k.k dj jgk gS mls mruk gh cMk ekudj lEeku vkSj jktuhfr esa dfFkr lsok dk volj fn;k tk jgk gSA bruh vf/kd vkfZFkZd vlekurk [krjukd gS vkSj Hkfo”; esa dzkafr ds fy, mRrjnk;h gksxh A vr% detksj vkSj fiNMs rcds dks Hkh funsZ’ku ,oa lgk;rk iznku dj mij mBkus dk iz;kl djuk pkfg, A ;g gekjk mRrjnkf;Ro Hkh gS vkSj vko’;drk Hkh A ns’k esa lektokn ykus dk fu;ksftr ,oa Bksl iz;kl djus dh egrh vko’;drk gSA
 /ku ds }kjk O;fDr u dsoy HkkSfrd lalk/kuksa cfYd ekuoh;  lalk/kuksa dk Hkh ekfyd cuk gqvk gS vkSj mUgsa viuh bPNkuqlkj fdlh Hkh mn~ns’; ds fy, dke esa ysrk jgrk gSA tcfd ykHkka’k esa lHkh O;fDr cjkcj ds Hkkxhnkj gSA HkkSfrd lalk/kuksa dk Hkh ykHkka’k gksrk gS ijUrq vf/kdka’k ykHkka’k rks ekuoh; lalk/kuksa dk gh gksuk pkfg,A izR;sd dks ml laLFkku dk ekfyd gksuk pkfg, u fd fu’pr lhfer vk; dk ukSdjA laLFkku fdruk gh mUufr djsa ekfyd dk ykHkka’k rks c

Saturday, January 23, 2010

साले की शादी -

आप लोगो को ब्रह्मा जी तो याद ही होंगे जो आदमी बनाते है |
एक बार की बात है, ब्रह्मा जी को अपने साले की शादी मैं जाना था अब आदमी बनाने का महतवपूर्ण काम छोड़  कर जाये तो कैसे | पर जाना भी तो जरुरी था तो भाई वही पर काम करने वाले एक साथी सहयोगी को अपनी कुर्सी पर बिठा कर कुछ काम वाम समझा कर चल दिए ३ दिन की छुट्टी पर |
जिस आदमी को काम पर लगाया था वो था काम का भूका उसने देखा की एक कमरे मैं आदमी बनाने के पार्ट्स पड़े थे बस उनको जोड़ना बाकि था जिसे आदमी बन जाता होगा. और जो कामगार इन पार्ट्स को जोड़ने का काम करते थे वो एक कमरे मैं बैठ कर तीन पत्ती खेल रहे थे उस आदमी ने पुछा की तुम लोगो को कुछ काम नहीं है क्या जो पत्ते खेल रहे हो तो उनमे से एक बोला की भाई साहब आर्डर नहीं आया है आप आर्डर निकल दो तो हम लोगो के पास काम ही काम है फ़िलहाल आदमी बनाने का कोई आर्डर नहीं निकला हुआ है साहब इसलिए हम लोग कुछ नहीं कर रहे है | अब तो उन भाई साहब को मानो मजा आ गया उन्होंने झटपट आर्डर निकाल दिया नए आदमी बनाने का |
बस फिर क्या था ३ दिनों मैं बहुत से आदमनी तयार हो गए | जब भ्रम जी शादी से वापस लोटे तो देखा की पार्ट्स वाले रूम मैं पार्ट्स लग्बह्ग ख़तम हो गए थे उन्होंने उस आदमी से पुछा की ये आप ने क्या किया बिना आर्डर के ही आदमी बनवा दिए चलो कोई बात नहीं पर क्या आपने ये रूम खोला | उस आदमी ने कहा की नहीं मैंने तो सिर्फ पार्ट्स वाला रूम ही खोला था जो आदमी बनाने के लिए जरुरी था इस रूम में क्या है | तो ब्रह्मा जी ने कहा की इस रूम में आदमी का दिमाग रखा हुआ है वो भी इन पार्ट्स के | अब अगर औडिट हो गई तो मैं क्या जवाब दूंगा ऑडिटर को अब ऐसा करो की जल्दी से ये सरे दिमाग बचे हुए पार्ट्स के साथ फिट कर दो जिसमे जितने आ जाये बस इनको ख़तम करना है और हा ये काम जल्दी हो जाये उतना ही अच्छा है |  अब क्या था जो बाकि पार्ट्स बचे थे उनमे उन सारे दिमागों को भर दिया गया और काम ख़तम कर दिया गया
मित्रो ब्रह्मा जी की उन ३ दिनों की छुट्टी और उस भले मानस की काम की इच्छा को हम आज तक भुगत रहे है |
कैसे जिन लोगो मैं दिमाग डाला ही नहीं गया था वो हे आप और हम |
और जिन लीगों मैं दिमाग जरोरत से जयादा ड़ाल दिया था वो हे जो हमको चला रहे है  वो हमको बिना बात ही लूट रहे है पैसा बना रहे है और न जाने क्या क्या कर रहे है |
वो लोग इतने insecure है की बस पैसा बन ले जो भी हो जायाडा से जयादा अपने कब्जे मैं के ले पता नहीं कल क्या होगा |
या फिर वो हम सब को वो बनाना चाह रहे है जो हम आज़ादी से पहले थे मेरा मतलब समझ रहे है न आप |
इन एक्स्ट्रा ordinary लोगो ने इतना अच्छा जाल बुना है की आप और हम इसको जानते हुए भी कुछ नहीं कर सकते क्यू की कुछ किया तो हमारी नौकरी चली जाएगी या हमको क्या करना है जब लोगो को ही  कोई परवाह नहीं है तो और न जाने क्या क्या बहाने बना लेते है अपने आप को समझा लेने के |
आज चीनी बहुत महंगी हो गई है की आम आदमी उसको खरीद नहीं सकता या यु  कहे की उस कीमत पर नहीं मिल रही जिस दाम  पर आम आदमी को मिलनी चाहिये | ४८ रुपये किलो चाहिये तो जितने किलो चाहिये उतनी मिल जायगी पर २४ रुपये किलो नहीं मिल सकती क्यू की उससे एक्स्ट्रा ordinary लोगो को प्रोफिट नहीं होगा इसलिए ये चीनी उनके गोदामों से बहार नहीं आ सकती क्यू की वो सड़ सकती है, ख़राब हो सकती है लेकिन कम कीमत पर लोगो को नहीं मिल सकती |

ब्रह्मा जी आप ने एक गलती कर दी और उसकी सजा हम लोगो को यानि सारी दुनिया को हमेसा भुगतनी पड़ेगी |
मेरे प्यारे देश के बिना दिमाग के लोगो अपने दिल से काम लो और इन एक्स्ट्रा ordinary लोगो को सबक सिखा कर अपना और अपने बच्चो का future बचा लो जागो और इनको भारत के संविधान की वो पंक्तिया याद दिला दो जिनको ये लोग सिर्फ अपने लिए ही सार्थक कर रहे है |
"हम भारत के लोग भारत को ....."
मैं उस पवित्र ग्रन्थ की आड़ ले कर कुछ नहीं कहना चाहता ये उसका अपमान होगा जिससे उन लोगो को कोई फर्क नहीं पड़ता क्यू की .....

आप सभी को धन्यवाद.